Sunday, January 13, 2008

चाय बैठकी जिन्दाबाद ......


उम्मीद से कम चश्मे खरीदार में आये .....

यारों हम ज़रा देर से बाज़ार में आये ......


चाय बैठकी के सभी बैठक बाजों ,मित्रों ,पत्रकार( असली और नक्काल दोनो) ,सकार (कार वाले ) और बेकार (बिना कार वाले ) अपने सारे यार ..स्वीकार करें मेरा नमस्कार ...आप सभी को जयहिंद ...
मित्रों ...चाय बैठकी में जरा देर से आने के लिए मुआफी चाहता हूँ ...मुझे मालुम है कि यह ऐसी जगह हैं जहाँ देर से आने के बावजूद चाय तो मिल ही जायेगी फुल नही तो कट ही सही... पैसा न भी हो तो उधार चलेगा ....


मित्रों चाय बैठकी का दायरा निरंतर बढ़ता जा रहा है ....पर रफ़्तार जरा धीमी है ..आप में से कुछ मित्रों के पास इन्विटेशन गया है ...उनसे अनुरोध है कि जल्दी उसे स्वीकार कर मैदान में आ जाये ... कुछ मित्र लगातार अनुरोध के बावजूद अपना मेल एड्रेस नही भेज रहे (सुनत हो न भाई ,नाम न लेबे ) ...आपके बगैर महफ़िल अधूरी है ...आय जाओ भैया ..नए बैठक बाज अनंत जी का स्वागत है ..पुराने बैठक बाजों( भाई अजय राय ,अभिनव राजेश अभिमन्यु जयंत शशि ..)ने तो महफ़िल जमा ही रखी है...पर आपो आई जाबो तो चाहिया के स्वादे बढ़ जाई ...भैया ई ब्लोग्वा आपे लोगन का है ..एक ठो शेर अर्ज है (है तो बहुत पुरान पर एमा जान बहुत है ).....

हम अकेले ही चले थे जानिबे मंजिल मगर ....

लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया ...

तो भैया तो एमा `हम ' आपे लोग हो ...मैं अकेले नही हूँ .. आप सब आय भर जाओ .कारवां तो ससुर खुद बखुद चल पड़ी ... काहे से कि ई टीम के एक एक आदमी लाखन का नचावे वाला है ...तो भैया चलिथी...जल्दी बैठकी माँ आयो .........

चाय बैठकी जिन्दाबाद ........

1 comment:

Sandeep Singh said...

कस गुरू....
अमें बहुत दिन से सोच रहे थे कि आखिर इलाहाबादी बैठक बाज ब्लॉग की मुहिम मा शामिल काहे नहीं भए लेकिन अब लग रहा है कि जल्दी ही ब्लॉग स्पॉट की भंडार क्षमता की मां-बहिन होए वाली है, काहे से कि ई ब्लॉग अइसन जगह से निकला है जहां नानपेड रिपोर्टर इस्टिंगर की भरमार है। कट चाय के साथ सिगरेट तो ई अड्डा पे शेयर होइते है, गोल्डन कस मा भी दुई तीन लोग निपट लेत हैं। हालांकि ई अलग बात कि बैठक खतम होय तक कौनौ न कौनौ की सुगलतै रहत है.....(बुद्धिजीवी तो आप पैदाइसी है इसपीलेन का करी)। तौ भइया चाय बैठकी जिंदाबाद।
संदीप सिंह, sands.singh@gmail.com