Tuesday, January 8, 2008

भाई के लिए अपील नहीं तो फिर किसके लिए...?

जब कोई उम्मीदवार चुनाव लड़ता है तो उसे लड़ाने वाले वोट अपील तो करते ही हैं भाई... और करना भी चाहिए। क्यों अशोक भाई सही कह रहा हूँ न...? रही बात बेगानी सीट की तो भाई अशोक जी के लिए कम से कम मैं तो बेगाना नहीं हूँ। वो भी ऐसा ही मानते हैं। मेरा भाई चुनाव लड़े या मैं... अपील तो ज़रूर करूंगा। और हाँ मैं फिर कहूँगा कि अपील की जब जहाँ ज़रूरत होगी वह आगे भी की जाएगी। हो सकता है मैं ही करूं।
रही बात व्यस्तता की तो शायद रोज़ी-रोज़गार में जुटे हर शख्स की यही समस्या है। चाहे वो मूंगफली का ठेला लगाने वाला ही क्यों न हो... फिर नक्कालों से बिल्कुल इतर "असली पत्रकारों" का व्यस्त रहना तो लाजिमी है...

शुभकामनाओं सहित...
अभिनव राज

1 comment:

राजेश पुरक़ैफ said...

हंगामा है क्यूं बरपा थोड़ी सी जो.............