Friday, October 31, 2008

चाय की chuski

photo

दिवाली की शुभकामनाये

सुबह उठे और मेज़ सजा ली हम रिन्दों की क्या दीवाली पेट भी खाली जेब भी खाली मुफलिस की कैसी दीवाली दिल में सबके नफ़रत कालीजगमग कैसे करे दिवाली दीपावली कि बहुत बहुत शुभकामनाये .....

Thursday, October 2, 2008

chay

चंडीगढ़

safar ka ek aur padav,chandigarh. hariyali, good traffic sence, saaf suthra, 2 oct se pahle se hi dhoomrapaan nishedh,well maintain aur sunsan park,chay baithkee bilkul nahi...........videshi disigner ne shahar ka naksha taiyar kiya aur videsh ki tarj par basaya.sab kuch naya naya sa. sari sadaken aur chaurahe lagbhag ek se roj inhi bhool-bhulaye me bhatakta phirta hoon ek aur tasveer ki talash me. bahut yaad aati hain apne shahar ki jani pahchani galiyan aur chay baithkee ke theehe.

Tuesday, September 23, 2008

क्या येही ज़िन्दगी है.......

शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है? जब यही जीना है दोस्तों तो फ़िर मरना क्या है? पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है भूल गये भीगते हुए टहलना क्या है? सीरियल्स् के किर्दारों का सारा हाल है मालूम पर माँ का हाल पूछ्ने की फ़ुर्सत कहाँ है? अब रेत पे नंगे पाँव टहलते क्यूं नहीं? 108 हैं चैनल् फ़िर दिल बहलते क्यूं नहीं? इन्टरनैट से दुनिया के तो टच में हैं, लेकिन पडोस में कौन रहता है जानते तक नहीं. मोबाइल, लैन्डलाइन सब की भरमार है, लेकिन जिग्ररी दोस्त तक पहुँचे ऐसे तार कहाँ हैं? कब डूबते हुए सुरज को देखा त, याद है? कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है? तो दोस्तों शहर की इस दौड़ में दौड़् के करना क्या है जब् यही जीना है तो फ़िर मरना क्या है....

Tuesday, September 16, 2008

रोटी का धर्म...

जो भीख माँग कर रोटी-रोज़ी चलाते हैं वे धर्मों के बँटवारों को नहीं मानते. उनके लिए मंदिर के भगवान, मस्जिद के रहमान या मालेगाँव के बड़ा कब्रिस्तान में कब्रों के निशान...सब बराबर होते हैं.राजनीति भिखारियों की इस धर्मनिर्पेक्षता की विशेषता से परिचित होती है इसीलिए कभी उनके माथे पर तिलक लगाकर रामसेवक बना दिया जाता है. कभी उनके सर पर टोपी रखकर, अल्ला हो अकबर का नारा लगवाया जाता है और कभी राजनीतिक शक्ति के प्रदर्शन के लिए उन्हें गाँव खेड़ों से बुला लिया जाता है.जिधर भी रोटी बुलाती है, ग़रीबी उधर चली जाती है. ग़रीबी की दुनिया खाते-पीते लोगों की दुनिया की तरह सीमाओं और सरहदों में नहीं बँटती. इसकी दुनिया रोटी से शुरू होती है और रोटी पर ही समाप्त होती है. वह ख़ुदा को मूरत या कुदरत के रूप में नहीं सोचती.इस ग़रीबी के लिए आसमान और ज़मीन दो बड़ी रोटियों के समान हैं जिनमें उसकी अपनी रोटी भी छुपी होती है, जिसको पाने के लिए कभी वह भजन गाती है, कभी कलमा दोहराती है और कभी जीसस की प्रतिमा के आगे सर झुकाती

Monday, September 8, 2008

भरी जवानी मै तीर्थ यात्रा


कभी ऐसा सोचा नही था कि भरी जवानी में तीर्थ यात्रा करनी पड़ेगी ... भला हो अमर उजाला वालों का देहरादून से हरिद्वार लाकर पटक दिया.....अब शायद येही दिन बचे थे कि धर्म नगरी में कि रातें करवट लेकर, 'शाम गंगा किनारे और दिन सडको कि ख़ाक छानकर बीतेगा .....

पत्थर की मूर्ति

पत्थर की मूर्ति पूजनीय है
इसलिए नही कि उसमे देवत्व है
बल्कि इसलिए कि उसने तराशे जाने का दर्द सहा है

Monday, August 18, 2008

dard

कई पीडी से
देख रही है
आख्ने!
एक ख्वाब
आजादी का !
आजादी
जहा होगी रोटी
हर थली में
अमीरी नहीं चुसे गई
खून गरीबी का
हमारे रहबर
न खून हमारा यू
बहाए गे
नफरत के चिराग
बुझ जाये गे
जिसके लिए
हमारे पुरखो ने
खून बहाया था
क्या वो आजादी
दिन आ गया
लोग जस्न क्यों ?
आजादी का
मना रहे है
मना रहे है
या
सिर्फ खुद को बहला रहे है
या
सिर्फ हमें जला रहे है

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधईयाँ...शुक्रिया



ऐ सुबह! मैं अब कहाँ रहा हूँ
खवाबों ही में सर्फ़ हो चुका हूँ

क्या है जो बदल गयी है दुनिया
मैं भी तो बहुत बदल गया हूँ

मैं जुर्म का ऐतराफ़ कर के
कुछ और है जो छुपा गया हूँ

मैं और फ़क़त उसी की ख्वाइश
इखलाक़ में झूठ बोलता हूँ

रोया हूँ तो अपने दोस्तों में
पर तुझ से तो हंस कर मिला हूँ

अए शख्स मैं तेरी जुस्तुजू से
बेजार नहीं हूँ, थक गया हूँ

Saturday, July 19, 2008

Rang....


mere man ka vikar kahen ya vikriti..par...Sangam mai lag gayi AAG...Us din...

Gilloo.....Bachpan mai Mahadevi ji ki kahani se pyaar ho gaya tha kyun ?? nahin janta tha par Gilloo aksar sapne me milta...Aa wohi pakad mai aaya to ....kash mere paas bhi ek hota waisa hi...

Saturday, July 5, 2008

"DHARM PAR RAJNEETI", BUS KARO.......!

Haal hi mein hui dharm k naam par rajniti ne sab ko jhakjhor kar rakh diya hain...! Amarnath shrine board ki jameen mamle ko lekar poore bharat ki shanti aur aman chain ko bigadne ki koshish ki gayi hain...bhagwa brigade ne apni narangi chole ki aad mein jo kuch bhi karwaya hain gaya kya wah rajniti k maidan mein sahi hain ya phir galat..yahan to Indore mein hui ghatna ne sab kuch baya kar diya hain...VHP aur BJP k bharat band k dauran jo kuch bhi hua woh har kisi ne dekha..Dharm k naam par chichori rajneeti karne walo ne yah bhi nahi socha ki ankhir iska niskarsh kya niklega..! Ankhirkaar dharm ko bhi poori tarah se sankat mein daal diya gaya..Ab shayad aane wale aagami Lok Sabha ki dastak ne poori partio ko shayad Amarnath ki jammen se badhiya mudda koi nahi diya..! Tabhi to dharm ko mudda banakar yeh Rajneta apni fasal katne mein lage hue hain..! Satta k galiyaro se apni chunavi mohare fit karne mein lage yeh rajnetao ne yah bhi nahi socha ki ankhir ya kahin Hindutva k naam par galat to nahi ho raha..! Apne naye-naye hatkando ko apnakar sabhi partia apni rotia sekne mein lagi hain...! Lekin kya yeh sahi hain ki "Dharm" ko apna mudda banakar poore desh k aman chain ko cheena jaye..? Lekin sawal yahan uttha hain ki poore desh mein jo kuch hua, kya woh sahi tha.....? Har koi yahi keh raha hain ki....Bus Karo.................!

Friday, July 4, 2008

Jaalim Media....! ARUSHI'S MURDER..!

HAAL HI MEIN NOIDA KE BAHUCHARCHIT ARUSHI MURDER CASE MEIN MEDIA KI JO BHUMIKA DEKHNE KO MILI WOH BAHUT HI SHARMNAK THI..KHAIR APNI TRP BADHANE K LIYE CHANNELS NE JO HATKANDE APNAYE WOH DEKHNE LAYAK THE..EK LADKI K UPAR IS TARAH SE BLAME LAGAYEGE JAB KI WOH DUNYA MEIN NAHI THI....AGAR AAPSE POOCHA JAYE TO AAP ISKO KYA REMARKS DENGE..IT'S APPRECIATING OR WORST THING..WHTA WILL U THINK ABOUT THE ROLE OF MEDIA IN ARUSHI'S MURDER GIVE UR VIEWS..

Thursday, July 3, 2008

Friday, June 27, 2008

प्यार अंधा होता है, माया भी यही कहती….

समानान्तर चीजों में भी विरोधाभाष होता है...गज़ब का विरोधाभाष। कहने को तो वो एक पुल के दो सिरे हैं। एक सिरा मुंबई के भायखला इलाके में खुलता है तो दूसरा सात रास्ता चौराहा से पहले पड़ने वाले एक और चौराहे से जुड़ जाता है।

एस ब्रिज (S).. जी हां अब इसी नाम से जाना जाता है वो पुल। जिसके दोनों सिरों के अलावा ऊपर से गुजरती सड़क के समानान्तर छोर पर बने फुटपाथ भी हमशक्ल ही नज़र आते हैं....बस अंतर है तो यही कि फुटपाथ के एक सिरे पर थम चुकी हैं प्यार के नाम कुर्बान जिंदगियां।

.......माया, यही नाम बताया फुटपाथ पर उगी दिखने वाली उस स्थूल काया की गौर वर्ण महिला ने।

एस ब्रिज से गुजरते वक्त वैसे तो किसी के भी कदम अकसर दिखने वाले एक दृश्य को देखकर थम जाते हैं....दुधमुहे बच्चों के हाथ में बंधी रस्सी का एक सिरा जब फुटपाथ की रेलिंग में गड़ी किसी बड़ी सी कील से जुड़ा हो तो एकबारगी किसी के भी दिमाग को हथौड़े की चोट तो लगेगी ही। दरअसल माया की माने तो ये बच्चे उसी के ही हैं।

इन बच्चों के पास ही फुटपाथ पड़ी दिख जाती है वो मैली कुचैली लड़की जो अभी कुछ महीनों पहले तक अपने पैरों पर भागती फिरती थी, जाने क्या हुआ उसे मानों दीमकों ने भीतर से खोखला कर डाला। हाथ पांवों की उभरी नसें बिलकुल दीमक की बांबियां नज़र आने लगीं, कुछ दिनों पहले तक वो कूड़ा-कचरा बीनने वाले लोगों के साथ उसी फुटपाथ पर सुट्टा मारते, ताश की पत्तियां फेंटती रहती थी लेकिन अब शरीर हांड़ मांस का पुतला भर रह गया।

भरे पूरे परिवार के साथ उसी फुटपाथ पर बस दो फिट की दूरी पर रहने वाली माया बताती है कि ये पुतला कुछ महीने पहले ममता का बोझ भी ढो चुका है। बाद में आखिर ऐसा कौन सा रोग लगा कि उसकी देह में इतनी भी कूबत नहीं बची कि वो अपने पैरों पर खुद के शरीर का भार ढो सके। माया भी अब उससे पूरी तरह उदासीन है कहती है, ‘जब मरद को ही उसकी फिकर नहीं रही तो और कोई क्या करेगा।’


वैसे भी मुंबई की रफ्तार ही कुछ ऐसी है कि यहां लोगों को खुद की पीर भी जल्द ही जब्त करनी होती है, फिर पीर पराई लोग यहां क्या जाने....।

(समूची खबर पढ़े सांझ सवेरे पर....)

http://sanjhsavere.blogspot.com/2008/06/blog-post_23.html

Thursday, June 26, 2008

मय हू एकाकी वन का वासी
एकाकी पन ही मेरा जीवन साथी
जब जग सारा हमको छोर चला
माय था कोलाहल से दूर खरा
थी निर्जंत भरपूर
आँखों में था आंसू मन में था भारीपन ..............................

Chay Baithkee: Kahin Is BLOG ki Sham na ho jaye...

हम जैसे लोगों के होते हुए ये ब्लॉग बंद हो जाय ये संभव ही नहीं है भाई. हम अभी जिन्दा हैं.

घूंघट की आड़ से.....




Saturday, June 21, 2008

सांझ-सवेरे: भोर...

sandeep sir kavita likhine ke baad photography ke liye waqt nikaliye....

Thursday, June 19, 2008

प्रताप सोमवंशी दक्षिण अफ्रीका में...


पिछले दिनों के सी कुलिश अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित पत्रकार प्रताप सोमवंशी फिलहाल दक्षिण अफ्रीका दौरे पर हैं। सोमवंशी वहाँ बतौर मीडिया एक्सपर्ट वहां पर गए हैं... पूरी जानकारी के लिए यहाँ पर क्लिक करें...

Wednesday, June 18, 2008

Sunday, June 8, 2008

Sangam kinare...


Sangam Kinaare ........

Kahin Is BLOG ki Sham na ho jaye...




Ashok bhai mere MITRA bhi hain aur Margdarshak bhi...Chay Baithkee ka janm mere samne ya yu kahen ki ham dono ne milkar ki ..halanki shuruaat mi mai iske liye bahut uttsahit nahi tha par Ashok sir ki mehnat aur Zoonoon ne dheere dheere mere man mai bhi ghar bana liya....


par kal achanak bahut dar sa gaya kyuki Ashok sir net par aaye aur "bole yaar mai aaj is blog ko delete kar dunga..." maine poocha ki KYUOOOOON ? to bade bhare man se unhone kaha ki is blog se jude logon ke thande pan ne mughy bahut nirash kiya hain , iske baare mai maine jo gati shoch rakhi thi wo speed isme aa nahin paa rahin hain lihaza main aaj isse chutkara paa lunga...


iske baad kafi der tak mainey bahas mubahisa kiya uski tafseel yahan dena gairzaroori hain so...kul milake mainy is baar ham sab ko jodne wali is zameen ko khone se bacha liya.....Agli baar pata nahain mai waqat par rah paoon ya nahin ...isliye aap sabhi se Zinnda rahane ka nivedan kar raha hoon...Abhimanyu.

Tuesday, June 3, 2008

हवा के संग संग

मैन हिट me

ॐ नमः शिवाय ......
सिर्फ़ पंखों से कुछ नहीं होता ...हौसलों से उड़ान होती है....
Ferrari car at आनंद भवन
विजयनगरम हॉल

Sunday, June 1, 2008

सुनो दोस्तों

0 सुनो दोस्तों यह दास्ताँ
एक दिन जिले पांच लाख लोग डीएम साहब के दरवाजे पर जाएं।
सवाल करें कि रामलाल को थाने se bhagaya kyon.
yah bhi poochen ki bookh se tadap kar idrish ka beta mara kaise
kaun deta hai apake bangle ka kharch, bangle ke ac ka bill.
kya karenge sahab
socho to
kya jawab denge ?
kya kahenge
unse, cheekat pahane ganwaron se.
kuchh bol bhee payenge?

हम किसी से कम नही ...! देखा...!
माँ के लिए आंसू ............!

तैयारी

कौतुहल -2

कौतुहल

निशाना और वो भी सुंदर गुडिया पर...........


Friday, May 30, 2008

नमन चाय बैठकी में होने वाली बतकही को

meerut कल poorw men हुए तीन हत्याकांड के विरोध में बंद था सुबह ८ बजे से ड्यूटी शुरू हुई बाजार स्वतःस्फूर्त से बंद दिखा । कुछ पारंपरिक तस्वीरों के कैद करने से iter की चाहत दिन bhar jehan में tari रही सो मैं भी दिन bhar शहर में होने और न होने (sannata) वाली gatividhiyon को अपने camere में sahejata रहा। hukka gudgudate bephikra बाबा, फ़ोन से apno ko अपनी kushlta और शहर के halat के bare में batiyate लोग, bhoonkh और pyas से kumbhlate ड्यूटी per mustaid sipahi और भी कुछ sunder तस्वीरें मिली। sham होते होते thakan के karan चाय की talab हुई , चाय बैठकी की yaad ayi, आप सब yaad aye, अपना शहर yaad aya।......................लिक्खाड साथियों कुछ गलती हो तो माफ करना।

Monday, May 26, 2008

Mai,maa aur munnavar



Abhinav Bhai ka lekh mera matlab ki PoST Mai Maa aur Munavvar padh kar kuch kahana sahimai muskil hai to unkey liye ye ek Tasveer....


Abhimanyu.


Suneel Bhai se aaj bat hui to unhone kaha ki aajkal chaybaithaqi nahi ho rahi hani ye ghalat baat hain to maine unse kaha ki aaj hi main shamil hoto hoon tab unhone apni naarazgi ka raaz khola ki aaj hi unhone nayi tasveeren

upload ki hain to maine kaha tb fir mai aaj hi uska counter karta hoon

To ye counter kaisa aap log zroor batayen. abhimanyu.

aur inko kya kahen




Sudar ye bhi kam nahin par aapke unki jaise nahin


कितनी सुंदर हो


हाथ मिलावो दोस्त