Thursday, January 17, 2008

दो घूंट-चार कश


दो घूंट- चार कश से हरदम गुलजार रहती है चाय बैठकी। कहकहे के साथ साथ चलता रहता है कश पे कश।
नोट- ये फोटो मैंने अपने मोबाइल कैमरे से क्लिक की हैं। सिर्फ जुगल बंदी के लिए।

1 comment:

sunil kaithwas said...

mobile se hi sahi great photo...