Tuesday, January 8, 2013


सर्दी का सितम बदस्तूर जारी है...पूस की रात...कहर बनकर बरप रही है...सर्द हवाओं की एक चादर फैल गई है..जिसने जीवन की रफ्तार पर लगाम लगा दी है....गंगा की लहरों पर लिख गई हैं ठिठुरन की दास्तां....और इस दास्तां को पढ़ने और समझने के लिए घाटों से नदारद हो गए हैं...गंगापुत्र....तापमान का स्तर नेतांओं के बयान की तरह दिन ब दिन नीचे होता जा रहा है....दस जनवरी तक वाराणसी के जिलाधिकारी महोदय ने स्कूलों के बंद करने के आदेश दे दिए हैं...लेकिन मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल प्रचंड ठंड जारी रहेगी...कहते हैं...हवा का तेज़ खंजर सबसे ज्यादा बुढ़ापे में काटता है...लेकिन हवाएं जब बर्फ की बयार बनकर बहें...तो क्या महिलाएं...क्या पुरुष... क्या नौजवान...क्या बच्चे...क्या बूढ़े...सब त्राहिमाम करते नजर आ रहें हैं....जिस गली पर... जिस चौराहे पर आग की शक्ल भी नजर आती है...चार हाथ उसे सेंक लेना चाहते हैं.....कहते हैं सर्दी से लोग पर गए....माफ कीजिएगा साहब...लेकिन सर्दी जानलेवा नहीं होती...वरना सर्द प्रदेशों में रहने वाले लोग मर गए होते...जानलेवा होती है शासन प्रशासन की बदइंतजामी...यहा भी नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा भीषण ठण्ड से बचने के लिए न कोई व्यवस्था की गई न रैन बसेरा का समुचित इंतजाम...
सूबे की सरकार ने हिदायत दी है कि...शेल्टर होम दिन रात खोले जाएं...कंबल बांटे जाएं.... हर चौराहे और बस अड्डों पर दिन रात अलाव जले...लेकिन हिदायत का क्या है...अक्सर दी जाती है....
ये तेज सर्द हवा ये ठिठुरन भरा मौसम
खुदा कसम ये जनवरी अब जानलेवा है

1 comment:

अल्पना वर्मा said...

वाकई....समाचारों में देख सुन रहे हैं.
आप सब की हिम्मत की दाद देते हैं जो ऐसे मौसम को झेल रहे हैं.